क्या हो देश का नाम भारत (Bharat), इंडिया या फिर हिंदुस्तान ?

COLUMN चौपाल
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दिव्यांश सिंह

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में देश का नाम में इंडिया (India) शब्द को हटाकर भारत (Bharat) करने संबंधी जनहित याचिका (PIL) पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित मंत्रालय के समक्ष अपना प्रतिनिधित्व रखने की सलाह दी है।
आज हम भारतीय देश के लिए अंग्रेजी नाम का प्रयोग कर रहे हैं जबकि अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या सिर्फ 2% ही है , परिणामतः बाकी बचे लोग पीछे छूट जाते हैं।
भूगोल के एक निश्चित आयाम की परिभाषा से ही देश बनता हैं, भारत (Bharat) दुनिया का सबसे पुराना देश है, आज लोग जिसे एक देश की परिभाषा में गड़ते है या एक देश मानते हैं ये उससे बिल्कुल अलग हैं।
आज लोग देशों को बना रहे हैं भाषा, धर्म, जाति तथा नस्ल आदि के आधार पर, मूल रूप से लोगो के समानता से देश बनता हैं, लेकिन हम इस देश को पिछले चार से पांच हजार सालो से भारत के नाम से जानते आ रहे हैं। हमने कभी खुद को एक जैसा होने की वजह से, एक नही माना। अगर आप पचास किलोमीटर जाए, तो आपको अलग लोग, अलग पहनावे, भोजन, भाषाएं, और रहन-सहन मिलेगा। असमानता में समानता, भारत की सनातन उपलब्धि है।
तो ऐसा क्या है जो इसे एक देश बनाता है ?
जब यूरोपियन यहां आए तो कहने लगे हमने जिस देश के बारे में सुना था उसका वजूद ही नही है, क्योंकि यहां ऐसा कुछ नहीं है जो इसे बांधे रखता हो। वे इसे देश कैसे कह सकते हैं।
पर पिछले चार से पांच हजार सालों तक, उपमहाद्वीप तथा उस समय की ज्ञात दुनिया में हर जगह हमारे देश को एक राष्ट्र ही माना जाता था। चाहे कुछ समय तक हमारे देश में दो सौ से अधिक राजनीतिक सत्ताएं थी, तो यह एक देश क्यों कहलाता है? क्योंकि ये सिर्फ किसी धर्म, जाति की बात नहीं है, बल्कि हमारी राष्ट्रीयता सारे धर्मो के उदय से पहले की है। यह देश तब भी था, जब हम इसे हिंदुस्तान कहते थे, इसका मतलब यह नहीं था कि ये किसी धर्म विशेष मानने वालों का देश था अर्थात् हिंदुओं का निवास स्थान। हिंदुस्तान एक भौगोलिक वर्णन है, जिसका मतलब है हिमालय और इंदु सरोवर के बीच की भूमि।
भारत (Bharat) हमेशा से खोजियों और जिज्ञासुओं की भूमि रहा है। भारत का अर्थ है ,
भा – भाव या अनुभूति,
र – राग या सुर
त- ताल या लय,
जिसका मतलब ऐसी संस्कृति के निर्माण से है जहां हर कोई सही राग, ताल मिला के चल सके, जिससे जीवन की सही भाव/अनुभूति हो सके। अतीत के एक महान सम्राट का नाम भी भरत था, लेकिन उनका नाम देश से पड़ा न कि उनसे देश का नाम। जहां हिंदुस्तान एक भूगोल का वर्णन करता है, भारत एक प्राचीन, सनातन संस्कृति का। हमें हमेशा संस्कृति पर जोर देना चाहिए, क्योंकि संस्कृति का अर्थ है मिलन जो लोगो को आपस में जोड़ती है।
अगर हम India शब्द की बात करे तो इसका कोई अर्थ ही नहीं है , यूनानी लोग जो सिंधु नदी को सही उच्चारित ना कर पाने के कारण इंदु नदी कहने लगे । तत्पश्चात अंग्रेज भारत आए तब भारत को हिंदुस्तान कहा जाता था, और जब अंग्रेजों को भारत की प्राचीनता की जानकारी हुई , अंग्रेजों को यूनानियों द्वारा दिए गए नाम इंडस का पता चला जिसे लैटिन भाषा में इंडिया कहा जाता है तो उन्होंने भारत को India कहना शुरू किया। और एक कारण यह था कि अंग्रजों को भी हिंदुस्तान के उच्चारण में काफी मुश्किल होती थी ।
भारत दुनिया की अकेली ऐसी संस्कृति है जिसमे लगभग पांच हजार से अभी तक की परंपरागत जुड़ाव के साक्ष्य मिलते हैं, जैसे शादीशुदा महिलाओं का सिंदूर प्रयोग करना, मूर्ति पूजा जो हड़प्पा कालीन समाज में व्याप्त थे, और आज भी हैं ।
हमें अपने वतन को भारत ही कहना चाहिए, क्योंकि एक राष्ट्र की सोच को सबके मन में बसना चाहिए, देश बस सोच है, जब यह सोच आपके मन में जगेगी और दिल में उतरेगी और इसके लिए आपने एक जुनून पैदा होगा, तब ही हम असली देश बन पाएंगे, वरना देश बस कागजों पर होगा, और उसके लिए समर्पण और त्याग की भावना, कभी उस हद तक परवान ना चढ़ सकेगी ।
प्रयोग और खोजियों की भूमि होने के कारण आप खुद इसकी सार्थकता की जांच कर सकते हैं। अगले दो मिनट अपने मन में इंडिया इंडिया बोलिए और उसके अगले दो मिनट भारत भारत, आपको भारत के उच्चारण में एक गंभीरता, सांस्कृतिक, और परंपरागत जुड़ाव महसूस होगा, जैसा कि हमने अधिकतर राष्ट्रीय पहचानों को मौर्यकालीन या वैदिककालीन चिह्नों से जोड़ा है ।
भारत का उच्चारण करते ही आप खुद को हजारों साल प्राचीन जड़ों से जुड़ा हुआ पाते हैं , जो आपको ऐसी मजबूत नींव प्रदान करते हैं, कि आप अपने सपनों के भारत को उड़ने और ऊंची उड़ान भरने में किसी रुकावट को आत्मविश्वास से पार करने में सक्षम हो सकें।

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