गुंजन मिश्रा
किसी भी समाज की प्रगति जमीन पर नदियों को मिले स्थान से मापी जा सकती है। यही कारण है कि मुक्त बहाव (अविरल और निर्मल) वाली नदियों का आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक रूप से बहुत महत्व है। वैसे तो चित्रकूट में मन्दाकिनी, गुंता, बाल्मीकि, रसिन, बरुआ, ओहन आदि कई नदियां एवं 25 से अधिक छोटे बड़े नाले हैं, जिन पर बांध और बंधिया सिंचाई के लिए बनायी गयी है, लेकिन मन्दाकिनी नदी का अपना एक विशेष महत्व है। सदानीरा रहने वाली यह नदी भी अब सूखने लगी है। इसका कारण नदी जल बजट के बिना नदी के जल का सिंचाई, पीने के लिए उपयोग व रेत खनन आदि के कारण मन्दाकिनी का बहाव प्रभावित हुआ है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अगर देखा जाये तो मुक्त-बहने वाली नदियों को एक सूचकांक (Connectivity Status Index) द्वारा चार आयामों में कनेक्टिविटी के स्तर को पहचाना जाता है |
1. पार्श्व, ताकि मछली और अन्य प्रजातियाँ कैम ऊपर की ओर बढ़ें, जबकि पानी, पोषक तत्व और तलछट नीचे की ओर जाएँ।
2. अनुदैर्ध्य, ताकि नदी अपने बाढ़ के मैदान में आगे बढ़ सके, अन्य निवास स्थान में मछली को महत्वपूर्ण पोषक तत्व पहुंचा सके और पोषक तत्वों को नदी में वापस ला सके।
3. ऊर्ध्वाधर (भूजल के साथ कनेक्टिविटी), ताकि नदी बह सके और भूजल और जलवाही स्तर (अक्यूफर्स ) के साथ संपर्क कर सके।
4. अस्थायी (समय के साथ प्रवाह पैटर्न पर आधारित कनेक्टिविटी), ताकि समय के साथ नदी जल द्वारा प्रदान की जाने वाली महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी कार्यो में बाधा न हो।
लेकिन अब ये चारों प्रकार के बहाव मन्दाकिनी नदी में ख़त्म हो चुके हैं। इसका कारण बालू खनन के अलावा मन्दाकिनी की सहायक नदियों, नालों व झरनों का अतिक्रमण व प्रदूषण की वजह से सूख जाना भी है। लेखक गुंजन मिश्रा, पर्यावरणविद द्वारा 1994 में एक शोध कार्य के लिए गए अध्धयन के अनुसार मन्दाकिनी नदी का औसत बहाव सती अनुसूइआ, स्फटिकशिला, जानकीकुंड, रामघाट, कर्वी घाट, सूर्यकुंड और राजापुर में क्रमशः 19, 1.8, 1.8, 1.9, 1.8, 1.4, 0.96 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड था। यही वजह थी कि पुराने समय में 1970 से पहले मोहकमगढ़, जानकी कुंड, सूर्यकुंड में पनचक्की चला करती थी, लेकिन आज यही बहाव रामघाट और कर्वी घाट पर नगण्य हो गया है। मन्दाकिनी नदी का पर्यावरणीय प्रवाह कितना होना चाहिए, बिना इसके अध्ययन के सिंचाई आदि के साथ-साथ नदी किनारे बोर वेल अथवा ट्यूबवेल से पानी लेने के कारण नदी के कनेक्टिविटी स्टेटस इंडेक्स को भी प्रभावित करते हैं।
मन्दाकिनी नदी का स्वस्थ रहना कितना महत्वपूर्ण है वह एक अध्धयन बताता है कि बेटा मछली, गप्पी मछली, फ्लॉवरहॉर्न फिश, गोल्ड मछली, ऑस्कर मछली, ग्रास कार्प मछली आदि एक्वेरियम में पाली जाने वाली मछलियां 1994 में मन्दाकिनी नदी में भी पायी जाती थी, लेकिन आज प्रदूषण के कारण जल में घुली ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के कारण ये मछलियां विलुप्त हो चुकी हैं। वैसे भी नदियाँ और झीलें पृथ्वी की सतह के 1% से कम भाग को कवर करते हैं, लेकिन 17,000 मछली की प्रजातियां सभी कशेरुकियों की एक चौथाई का प्रतिनिधित्व करती हैं, साथ ही साथ लाखों लोगों के लिए भोजन, रोज़गार व स्वच्छ पानी प्रदान करती हैं।
पाठा के गाँधी के नाम से प्रसिद्द गोपाल भाई बताते हैं कि 1970 तक मन्दाकिनी में जानकीकुंड के पास इतना बहाव था कि वहाँ पर लगी हुई पनचक्की से हज़ारो कुंतल गेंहू का आटा बनाया जाता था। लेकिन आज मन्दाकिनी बिलकुल ठहर चुकी है।
गुंजन मिश्रा बताते हैं कि इस बार विश्व जल दिवस 2021 का विषय जल का मूल्यांकन है। मन्दाकिनी नदी का कनेक्टिविटी स्टेटस इंडेक्स ज्यादा न हो इस बात का ध्यान रखना यहां के स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी है । अतः ये राज और समाज की जिम्मेदारी है कि जल के मूल्य को समझते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए, साथ मिलकर चित्रकूट की नदियों को बांधों और प्रदूषण से मुक्त रखते हुए उन्हें उचित तरीके से उपयोग में लाया जाये।
(लेखक पर्यावरणविद हैं)